Saturday, August 18, 2018

गोवर्धन पूजा 2018 कथा , कहानी एवं निबंध ( Govardhan Puja story in Hindi )

नमस्कार दोस्तों , मैं  आप सभी का बहुत स्वागत करता हु |  आज हम इस लेख में गोवर्धन पूजा के महत्व एवं कथा , निबंध के बारे में  जानेंगे | 

 दोस्तों यह त्यौहार सभी हिन्दू लोग बड़े ही धूम धाम  से मानते है , लेकिन हम में से ज्यादातर लोगो इस त्योहार का भारतवर्ष में क्या महत्व है और उसको मानाने के पीछे की वजह क्या है यह नहीं जानते है |

अगर आपको भी गोवर्धन पूजा  की कथा , गोवर्धन पूजा विधी , गोवर्धन पूजा क्यों मानते है जानना है तो इस लेख को पूरा पढ़ना न भूले |

आज हम इस लेख में किन चीजों के बारे में जानेंगे 

  • गोवर्धन पूजा 2018 ( Govardhan Puja 2018)
  • गोवर्धन पूजा का महत्व ( Govardhan puja Importance 2018 in Hindi )
  • गोवर्धन पूजा कथा ( Govardhan Pooja in Hindi )
  • गोवर्धन पूजा क्यों मानते है 
  • गोवर्धन पर्वत की कहानी ( Govardhan pooja story in Hindi )
तो दोस्तों चलिए लेख को शुरू करते है 

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गोवर्धन पूजा 2018 में कब मनाया जायेगा 

Govardhan puja Date 2018 : 8 November 

भारतवर्ष के सबसे बड़े त्योहार दीपावली 2018 के एक दिन बाद , गोवर्धन पूजा का त्योहार मनाया जाता है|

गोवर्धन पूजा कथा , कहानी एवं निबंध ( Govardhan Puja story in Hindi )



कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा के दिन गोवर्धन पूजा का विधान किया गया है। इसे अन्नकूट  के नाम से भी अभिहित किया जाता है । 

उस  दिन सभी  देव -मंदिरो  मे अन्नकूट की सजावट की जाती है, जिसमे देवमूर्ति के समक्ष नाना प्रकार के पकवान बनाकर नैवेद्य के रूप मै अर्पित किए जाते है ।

 इस श्रृंगार को देखने के लिए मंदिरो  मे उस  दिन भारी भीड़ उमड़ पड़ती  है।

पौराणिक मानयता  के अनुसार उस  दिन ब्रजवासी नन्द बाबा के नेतृत्व  में  इन्द्रदेव  की  पूजा किया करते  थे। जिसे इन्द्रयाग कहा जाता है ।

 एक बार भगवान  श्री कृष्णा ने नंदबाबा  को भगवान  इन्द्र की पूजा  करने से रोक  दिया ।

उन्होंने  कहां कि, सब लोग  मिलकर गोवेर्धन  नाथ की पूजा करे तो  विशेष  लाभ होगा। 

उनके कहने पर सभी  ब्रजवासियों ने ऐसा ही किया और छप्पन भीग लगाकर गोवर्धन नाथ की  पूजा की। इसके फल स्वरूप इन्द्र देव  कुपित हो गए  और उन्होंने अपने मेघो  की आदेश दिया कि, तुम लोग  मूसलाधार बारिश  करके समस्त बृजमण्डल  को बहा  दो । 

मेघो  ने लगातार सात  दिना तक ब्रिज  यर घनघोर  वर्षा की 

गोवर्धन पूजा 2018 का  महत्व 

इस प्रकार का द्रिश्य  देखकर भगवन श्रीकृष्ण  ने गोवर्धन पर्वत को अपने हाथ  की कानी ऊँगली  पर धारण कर लिया। इस  विशालकाय पर्वत  के नीचे सभी  गोपो  को सुरक्षित रखा । 

भगवान् की इम अदभुत लीला को देखकर आश्चर्यचकित  इन्द्रदेव  घबरा उठे । 

इन्द्रदेव  को श्रीकृष्ण मे ईश्वरत्तव  का भाव  हुआ।  उन्होंने  श्रीकृष्ण  से क्षमायाचना  की और उनका दुगधाभिषेक  किया  वह  दुध जिस  स्थान मे बहकर एकत्रित  हुआ, उसे सुरभि-कुण्ड के नाम से जाना जाता  है  । 

इस  प्रकार भगवान् श्रीकृष्णा द्भारा इन्द्र का मान- मर्दन  किये जाने पर अन्नकूट का त्यौहार  विजय-पर्व  के रूप में मनाया जाता है

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